पांच करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर है तो नया रिटर्न फॉर्म भरना पड़ेगा

पांच करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर है तो नया रिटर्न फॉर्म भरना पड़ेगा

अक्टूबर से 5 करोड़ रुपए से अधिक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को नया रिटर्न फॉर्म जीएसटी एएनएक्स-1 भरना होगा। अब तक वे अपना रिटर्न जीएसटी आर-1 में भरते हैं। 1.5 से 5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले कारोबारियों को यह रिटर्न फॉर्म जनवरी 2020 से भरना होगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

  • अभी दो रिटर्न भरने होते हैं, नई व्यवस्था में तीन रिटर्न भरने होंगे
  • 1.5 करोड़ तक के टर्नओवर वालों को 4 की जगह एक ही रिटर्न भरना होगा

नई व्यवस्था के तहत सभी करदाताओं को नया फॉर्म जीएसटी आरईटी-1 भरना होगा

सबसे बड़ी राहत 1.5 करोड़ से कम के टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को मिली है। उन्हें अब एक साल में चार की जगह केवल एक रिटर्न फॉर्म ही भरना होगा। नई व्यवस्था के तहत अब सभी करदाताओं को नया फॉर्म जीएसटी आरईटी-1 भरना होगा। इस फॉर्म के तीन भाग हैं। जीएसटी आरईटी-1 मुख्य रिटर्न है जबकि फॉर्म जीएसटी एएनएक्स-1 और फॉर्म एएनएक्स-2 एनेक्सर हैं।

सूत्रों ने बताया कि इस साल जुलाई से सितंबर तक करदाताओं के परीक्षण के लिए नया रिटर्न सिस्टम उपलब्ध रहेगा। इसमें एएनएक्स-1 और एएनएक्स-2 शामिल हैं। इस परीक्षण का कर देनदारी या इनपुट टैक्स क्रेडिट पर बैक एंड पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परीक्षण के दौरान करदाताओं को फॉर्म जीएसटीआर-1 और फॉर्म जीएसटीआर-3बी के जरिए बिक्री और टैक्स की जानकारी देते रहना होगा। रिटर्न न भरने वालों के खिलाफ जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।

इस साल मई में ऑफलाइन टूल का प्रोटोटाइप जारी किया गया था। यह ऑनलाइन टूल जैसा ही है। इस साल जुलाई से करदाताओं को ऑफलाइन परीक्षण के आधार पर फॉर्म जीएसटी एएनएक्स-1 का उपयोग करते हुए इन वॉइस अपलोड करने होंगे। करदाता फॉर्म जीएसटी एएनएक्स-2 का उपयोग कर खरीद के इनवॉइस को देख सकेंगे और डाउनलोड कर सकेंगे। करदाता अपनी खरीद रजिस्टर को ऑफलाइन टूल पर इम्पोर्ट कर सकेंगे और अगस्त 2019 से खरीद इनवॉइस का मिलान करा सकेंगे।

प्रमुख रिटर्न फॉर्म जीएसटी आरईटी-1 और दो एनेक्सर फॉर्म होंगे

अभी व्यापारियों को भरना पड़ते हैं जीएसटी आर-1 और जीएसटी आर-3बी। अब इसकी जगह तीन फार्म आएंगे। जीएसटी आर-1 की जगह एएनक्स-1 और जीएसटी आर 3बी की जगह आएगा आरईटी-1। एएनक्स-2 तीसरा फार्म है। यह अभी लागू नहीं है।

जीएसटी विशेषज्ञ मुकुल शर्मा ने बताया कि एएनएक्स1 उसके लिए है जो सप्लायर है और माल बेचता है। वह बेचे माल की इनवाइस इस रिटर्न संलग्न करता है। यह माल या सेवाएं लेने वाले को बेचने वाले द्वारा भरी गई सारी जानकारी एएनएक्स-2 में दिखाई देती है। वह इसे डाउनलोड करके मिस मैच पता कर लेता है।

Related posts