नया टैरिफ आर्डर और उस विषय पर कुछ स्पष्टीकरण

नया टैरिफ आर्डर और उस विषय पर कुछ स्पष्टीकरण

TRAI ने टैरिफ आर्डर तो 2012  में जारी कर दिए थे. इसमें पारीभाषा थी सह्शुल्क प्रोग्राम वोह होगा जिसके लिए Headend Service Provider(HSP) द्वारा Broadcaster को ICO में निर्धारित समझौते  के अनुसार प्रति subscriber  प्रति माह ,के अनुसार भुगतान करना होगा । Broadcaster का इस business में केबल ओपेरटर या Subscriber और उनकी गड़ना से कोई सम्बन्ध नहीं होगा ।

Broadcaster को प्रोग्राम की MRP घोषित करनी थी जो subscriber से  ली जानी थी. और प्रावधान था कि HSP को MRP का 80% ही Broadcaster को देना होता है । शेष 20% का बटवारा HSP और LCO में परस्पर समझौते के अनुसार होना था. HSP को अपने नेटवर्क के subscribers को एक रेट लिस्ट बना कर देनी थी ( जिस में a-la-carte and bouquet की दरों क वर्णन किया हुआ हो ) और एक SAF फॉर्म LCO द्वारा subscriber से भरवाना था जिसमें subscriber समझे PAY, FTA, a-la-carte,  bouquet , BST का क्या तात्पर्य है और उसके अनुसार DAS service के लिये आवेदन करे ।

इस SAF को भरवा कर HEADEND में दाखिल होना था ताकि Subscriber ID निर्मित हो सके । इसके पश्चात HSP के warehouse में एक सेट टॉप बॉक्स का आवंटन होना था जिसमे SAF में अंकित choice के प्रोग्राम का ही अधिकरण (pairing of STB, VC and subscriber ID) कर के । STB को डिब्बे में पैक कर के निर्धारित subscriber का  LABLE लगना था Subscriber ID, Name, Adress of Installation, LCO details aur Customer Care Instructions ke saath । फिर उस पैक किये हुए STB को LCO technician के द्वारा अमुक subscriber द्वारा बतलाये  पते पर install करवाना था. ताकि SMS द्वारा Headend से itemized bill का सृजन संभव हो  सके लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।

HSPs ने थोक में STBs ( जिनमें pairing ना किये जाने के कारण Headend से प्रसारित सारे प्रोग्राम देखे जा सकते थे ) प्रदान कर दिये LCOs को । जिन्हों ने Subscriber से STB की price ले कर उनको install कर दिया । इस लिये SMS संचालित हुआ ही नंहीं और HSP ने TRAI & MIB को DAS implementation completed की रिपोर्ट दे दी । वैसे भी बहुत लोगों को SMS की जानकारी अभी भी नहीं है कुछ तो इसको एक bill printing software मात्र ही समझते हैं । उनको यह नहीं मालूम है की SMS ही DAS की आत्मा है जिसके बिना DAS प्राणहीन हो कर रह जाता है।

उधर LCOs ने बिना itemized bill and receipt के subscriber से एक fixed amount per month वसूल करने की रीति प्रचलित कर दी । जिस के कारण सम्बोधिकरण (addressability) स्थापित ही नहीं हुआ । Subscriber को सारे प्रोग्राम उप्लब्ध्ध  होते रह । Subscriber को तो बस एक मुश्त मासिक भुगतान पर  ढेर सारे प्रोग्राम देखने को मिलते रहे । बगैर यह जाने की इनमें से कौन सा PAY(सह्शुल्क ) था और कौन सा FREE (निशुल्क) । LCO प्रति subscriber वसूली राशि का कुछ प्रतिशत HSP को अर्जित करते रहे । और लाचार HSP केवल LCO को अर्जित राशि के दर पर थोक billing करने लगे । यह Cable Act and TRAI Regulations के प्रतिकूल था  लेकिन प्रचलित  हो गया । Subscriber आदी हो गये मासिक शुल्क पर सैकड़ों प्रोग्राम देखने के । और जब NTO लागू होना शुरू हुआ तो उन्हों ने प्रोघ्रम का चयन किया ही नहीं । और पहले कि तरह सारे प्रोग्राम देखने का चार्ज बहुत बढ़ गया  । Cable Operator ने एक बार फिर उनको अवगत करवाने में शिथिलता दिखलाई और TRAI को इसके लिये दोषी ठहरा दिया ।

TRAI इस ग़लतफ़हमी में रहे कि Cable Operator  लोगों पर इतने पोग्राम थोप रहे हैं । और यह कि संपूर्ण प्रकाशित एक्ट, रूल्स, रेगुलेशन LCO पढ़ कर समझ लेते हैं और अनके निश्पालन के लिये बाध्य होते हैं । यह नहीं कि इस समुदाय में स्वयं प्रशिक्षण का चलन ही नहीं है और शिक्षा केवल साक्षरता तक ही सीमित है । यही कारण है कि इनके प्रभावित क्षेत्र में DAS का निश्पालन उसके अपेक्षित लक्ष्य के अनुसार हुआ ही नहीं।

उधर Broadcaster शिकायत करते रहे कि HSP अनुचित carriage aur placement fee वसूलते हैं । HSPs को शायद यह अहसास नहीं था कि ऐसे भुगतान कि भरपाई PAY content की बढ़ी  हुई दरों से कर ली जाती है । विस्मरणीय है कि carriage fee का प्रचालन हुआ था analog regime में जब उच्च frequency के चैनल नेटवर्क के अंतिम छोर पर साफ़ नहीं दीखते थे और Broadcasters चाहते थे कि उनके चैनल के विज्ञापन लोगों को साफ़ दिखें । और इसके लिये HSPs उनसे low frequency प्रसारण के लिये वसूली करते थे । लेकिन Digital प्रसारण में अब इसका कोई औचित्य नहीं है क्योंकि digital  प्रथा में या तो सारे प्रोग्राम साफ़ दिखेंगे या कुछ भी नहीं दिखेगा । इस लिये TRAI को इस प्रथा को वर्जित करना चाहिये था । कुछ ऐसा ही हाल placement fee का भी है ।

Broadcaster चाहते हैं कि उनका प्रोग्राम EPG में प्रचलित प्रोग्रामों के निकट दिखे । और इस के लिये भी HSP वसूली करते हैं बहुरत लोगों को शायद यह नहीं मालूम होगा कि EPG में listing की जाती है PAT and PMT द्वारा जो कि MPEG पध्धति का अंश हैं । इसकी भी कोई आवश्यकता या औचित्य नहीं है । इस लिये इसको भी वर्जित करना चाहिये । यदि Broadcaster से ऐसी वसूली ना कि जाए तो PAY TV की दरों में  भी कमी आ सकती है । कानूनन carriage and placement fee charges का cable act and rules में सम्मिलन ना होने के कारण यह वसूली कानून की अवहेलना की पात्र मानी जानी चाहिये.

MIB ने DAS implementation completed की घोषणा कर दी । Controller and Auditor General of India ने प्रश्न उठाये की जितनी मात्रा में STB लग गये उस अनुपात में TAX में वृध्धि  हो ही नहीं रही  है तो DAS implementation की विश्वसनीयता की  पर प्रश्न चिन्ह लग गया । तब ही उपरोक्त वर्णित कमियां विदित हुईं और नया NTO लागू किया गया ।

NTO के मुख्य अंश थे:-

(क) Network Capacity Fee (NCF) प्रमुखतः कनेक्शन pipe स्त्रोत से उपभोक्ता को जोड़ने का माध्यम और उस सुविधा के लिये प्रस्तावित दर निर्धारण  जिसमें Subscriber choice पुनः प्राप्त कर के 100 प्रोग्राम तक मात्र Rs 130/- plus GST देय था इन प्रोग्राम्स की गिनती में 100 SD program की उपलब्द्धि होनी थी  प्रावधान किया गया की यदि subscriber कोई HD प्रोग्राम चुनता है तो गिनती में हर HD प्रोग्राम की गिनती 2 SD program के बराबर की जायेगी । इस गिनती में FTA or PAY TV a-la- carte or bouquet  में कोई अंतर नहीं रख्खा गया था । यदि bouquet में 17 प्रोग्राम हों तो गिनती एक नहीं 17 होगी । NCF केवल FTA तक सीमित नहीं था  दूर दर्शन के 28 प्रोग्राम Headend से प्रसारित करना तो अनिवार्य था (mandated inclusion in programs netcasted from Headend) लेकिन उनका subscriber को चयनित करने के लिये बाधित करना न्यायपूर्ण नहीं था । ऐसा समझना गलत था और यदि subscriber की choice 100 से अधिक प्रोग्राम्स की हो तो प्रति 25 प्रोग्राम्स के समूह पर अतिरिक्त NCF + GST chargeable होता है । इस charge  का Broadcaster से कोई सरोकार नहीं है और इसकालाभांश  HSP and LCO में बंटता है।

(ख) PAY Content charges separately for ‘a-la-carte’ and bouquets

(ग)  अन्य जैसे की STB provisioning (outright purchase, leasing or hire-purchase), activation charge etc.

(घ) CGST and SGST

(झ) Total Amount payable by a date

NTO के subscriber पर प्रभाव programs को गिनती अनुसार चयन करना 100 तक सीमित ,अथवा उस इसे अधिक और यदि पहले जैसे सारे प्रोग्राम देखने हों तो अधिक भुगतान करना । इस दशा का प्रभाव  है हमारा केबल का बिल बढ़ गया और TRAI अनुचित आलोचना और Cable Operators द्वारा उनका स्पष्टीकरण ना करवा पाना । TRAI पर व्यवसाय को नष्ट करने का अनुचित आरोप परामर्श पत्रों की अनदेखी comments  ना करना और खुले मंच (Open House Discussions) में अपनी बात सटीक तरीके से संक्षेप में वर्णन करने  और संभव सुझाव देने में Cable Operators की असमर्थतारही है । फिर भी TRAI ने पुनर्विचार की संभावनाओं  से कभी इनकार नहीं किया है ।

CATV का कार्य क्षेत्र,असंगठित अनियोजित एवं सञ्चालन क्षमता कुपोषित है । लेकिन यह भी सच है कि Subscriber के निकटतम सम्बन्ध इनसे ही हैं । सेवाएं यह ही प्रदान करवाते हैं और सेवा कि गुणवक्ता का कीर्तिमान भी यह ही बनाते हैं Subscriber के छोर पसर जो कुछ भी होना है इनके द्वारा ही संपन्न होना है आवश्यकता है इनमे सुधार लाने की ।

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लेखक – ले कर्नल(सेवा निवृत) विनोद चंद्र खरे

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