ट्राई न्यू टैरिफ ऑर्डर (एनटीओ) पर चिंता

ट्राई न्यू टैरिफ ऑर्डर (एनटीओ) पर चिंता

1. यह गार्गी सरकार द्वारा न्यूटैरिफ आदेश (NTO) युग में LCOs की   चिंताओं और OTT के प्रभाव  पर एक प्रकाशित (Maharashtra Cable Operators Federation MCOF) अध्यक्ष से साक्षात्कार सम्बंधित प्रकाशित लेख पर ध्यानाकर्षण करने हेतु प्रस्तुत  है

यह समाचार www.satiitv.com द्वारा लाया गया है

2. केबलटीवीनेटवर्क नियमन अधिनियम 1995 में 2011में संबोधन प्रणाली (Addressability) सम्मिलित करने की अनिवार्यता हेतु किया गया था (इस प्रणाली के अंतर्गत Headend से   ही subscriber द्वारा चयनित और   एन्क्रिप्टेड  प्रोग्राम सामग्री को देखने  की अनुमति या मनाही कर देने  की सम्पर्कहीन तकनिकी सुविधा होती है), जाहिर है कि केवल टीवी पर प्रसारित प्रोग्राम  देखने और उनके लिए प्रकाशित दरों पर भुगतान करने हेतु और  ग्राहक के सशक्तिकरण की दिशा में  एक itemized बिल प्रस्तुत करवाने  का भी प्रावधान किया गया था  । इस संशोधन को लोकप्रिय रूप से DAS (डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम) के रूप में जाना जाता है

3. यहप्रावधानडीपीओ (डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर्स),यानी केबल टीवी सेवा प्रदाताओं (एचएसपी यानि Headend Service Provider.और केबल ऑपरेटर समेत और जोड़ीदार समूह), HITS,  जो की धरती पर CATV वितरण सामान ही है,  और DTH (डायरेक्ट टू होम जिसमें केबल ओप्रेराटर जैसे मध्यस्थ की मौजूदगी नहीं होतीऑपरेटरों (ऑपरेटिंग) के लिए लागू है

4. सूचना और प्रसारण मंत्रालय(MIB) औरTRAI (भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरणद्वारा DAS कार्यान्वयन की देखरेख की गई थी। इसमें शामिल थे: –

(a) Video Content  दिशा विप्रितिकरण(टर्नअराउंड), दर्शन निष्क्रियन (एन्क्रिप्शन),  बहुमिश्रण (MUX), सदस्यता अधिकरण  प्रबंधन संदेश (subscriber authorization management messaging), मॉड्यूलेशन, संयोजन (combining), समतुल्यता (equalization), प्रसारण पूर्व  स्तर में समीकरण (level correction), नेटवर्क परिचालन अनुकूल   और वितरण प्लेटफॉर्म  योग्य बनाते  हुए डैस हेडएंड को स्थापित करने और संचालित करने के लिए एमआईबी द्वारा पंजीकरण। HSP की तकनीकी गतिविधियों का निश्पालन उस हेडएंड तक ही आश्वासित होता है   जहाँ से CATV के लिए एकत्रित परिवहन स्ट्रीम (aggregated प्रोग्राम स्ट्रीम), HFC (हाइब्रिड फाइबर कोएक्सिअल केबल) वायरलाइन माध्यम आधारित और संचालित  network  द्वारा सब्सक्राइबर परिसर में  STB (सेट टॉप बॉक्स) तक पहुँचाने के लिए करती है। CATV नेटवर्क के प्रसारण  में 106 आरएफ चैनलों (फ्रीक्वेंसी बैंड 47-862 मेगाहर्ट्ज में  7 या 8 मेगाहर्ट्ज चौड़ी पट्टियों में विभाजित) का प्रचलन  है  अर्थात CATV नेटवर्क में केवल 106 चैनलों पर ही प्रसारण संभव हो सकता है. डिजिटल प्रसारण में प्रत्येक RF चैनल में 10 से 24 प्रोग्राम compress किये जा सकते हैं इस प्रकार नेटवर्क में प्रसारित प्रोग्रामों की गिन्तिब 1060 से 2644 तक बढ़ जाती है. ध्यान दिया जाये की DAS में चैनल ओउर प्रोग्राम परियाय्वाची नहीं हैं

(b) अपने नेटवर्क के संचालन के क्षेत्र में एचएसपी से  विडियो प्रोग्राम संयोजित परिवहन स्ट्रीम प्राप्त करने और सब्सक्राइबर परिसर में पँहुचाने  के लिए वायरलाइन नेटवर्क की स्थापना और संचालन के लिए डाक विभाग के साथ सीओ (केबल ऑपरेटर) का पंजीकरण किया जाता है  । केबल ऑपरेटर्स द्वारा  हेडेंड से प्रसारित ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम में किसी प्रकार का भी बदलाव या तकनिकी परिवर्तन निषेधित है ।

5. कार्यान्वयन में, यह माना गया था कि सभी राजपत्रित (gazetted) नियम, विनियम और अधिसूचनाएं श्रृंखला में सम्मिलित सभी समुदायों द्वारा स्वयं ही लागू कर ली जाएंगी और कानून का पूरी वफादारी से निश्पालन हो जायेगा । यह माना  गया था कि अधिक साक्षर अंश , जैसे कि  ब्रॉडकास्टर, राष्ट्रीय स्तर के एचएसपी, हिट्स (HITS) और डीटीएच ऑपरेटर इत्यादि, इस प्रणाली का अक्षराक्षर निश्पालन  कर लेंगे ( सर्कार  में, जब केबल ऑपरेटरों का विवरण होता है तो शायद अधिकारीयों को लगता है कि प्रत्येक केबल ऑपरेटर एक हेडेंड भी संचालित करता है, जबकि Cable DPO में दो इकाइयाँ हैं यानी एचएसपी और CO).  वास्तविकता में मे साक्षरता, तकनीकी ज्ञान और video प्रबंधन का स्तर तुलनात्मक रूप से COs में निम्न ही है। फिर भी वे सेवा, जागरूकता पैदा करने और नियमों और विनियमों का पालन करवाने के लिए ग्राहकों के साथ सब से घनिष्ट संपर्क में होते  हैं।

6. यथार्थ में बहुसंख्यक वीडियो कार्यक्रम (multi program videos) ICO (इंटर कनेक्ट ऑफर) यानी ब्रॉडकास्टर और एचएसपी के बीच B2B समझौता किया जाता है , जिसके  अंतर्गत सह्शुल्क प्रसारण प्रोग्राम के लिए  ग्राहकों से वसूली जाने वाली अधिकतर दरों , (अधिकतम खुदरा मूल्य)यानी एमआरपी(MRP), का लिखित विवरण  दर्ज होता है। इस MRP में से HSP को ब्रॉडकास्टर्स को 80% और  और  HSP और CO के बीच एक  ऐसे ही ICO यानी B2B समझौते के माध्यम से 20% शेयर देने का उद्देश्य  था। बिलिंग में प्रत्येक STB को DAS में एक ग्राहक के रूप में गिनती की जानी थी मतलब हर STB की गिनती से एक दर्शक का योगीकरण

7. इसके अलावा, HSP को सब्सक्राइबर को उपलब्ध प्रोग्रामों का चयन करने और सब्सक्राइबर एप्लीकेशन फॉर्म (SAF) के माध्यम से आवेदन करने के लिए एक मूल्य  सूची (rate card) अधिघोषणा  के माध्यम से प्रोग्राम चार्ज  और सेवा शुल्क देने की सुविधाकरण करवाने की अपेक्षा की गयी  थी,  SAF HSP और सब्सक्राइबर के बीच B2C समझौता होता है  । इस फॉर्म को एचएसपी को सबस्क्राइबर आईडी(ID) बनाने के लिए जमा किया जाना था, ताकि एक विशिस्ट एसटीबी (अद्वितीय सीरियल नंबर द्वारा पहचाना हुआ) आवंटित हो सके , शुरू में  में सब्सक्राइबर द्वारा चयनित कार्यक्रम की पसंद को देखने के लिए अधिकृत  करने के लिए भी प्रोग्राम किया जानाथा  जिसे बाद में ग्राहक उपभोक्ता सहायता  डेस्क, जिसकी स्थापना एचएसपी द्वारा की जानी थी , के माध्यम से सब्सक्राइबर बदल सके. इस प्रक्रिया गो programming and pairing कहा जाता है

8. ये सब नहीं हुआ। HSPs ने प्रोग्रामिंग और पेयरिंग के बिना केबल ऑपरेटरों को थोक मेंSTB जारी किए। CO ने इन्हें सब्सक्राइबर परिसर में स्थापित किया। सब्सक्राइबरों ने एसटीबी के लिए बिना किसी रसीद और  स्वामित्व अधिकार  हस्तांतरण के लिए मांगी गयी कीमत का भुगतान किया।लेकिन कागजों में आज भी सब्सक्राइबर STB का मालिक नहीं बना है

9. केबल ऑपरेटर्स ने निश्पालन असहयोग हेतु , निर्धारित  बिलिंग के लिए हेडएंड में एसएमएस (सब्सक्राइबर मैनेजमेंट सिस्टम) संचालन  को प्रभावी होने ही नहीं दिया , नियमन उद्देश्य के विपरीत, केबल ऑपरेटर्स ने कार्यान्वयन को एक firewall जैसी सुरक्षात्मक प्रणाली  द्वारा निष्क्रिय करवा दिया । इस प्रकार DAS केवल नेटवर्क की प्रोग्राम क्षमता वृध्धि  अनुपात और QAM (64,128 या 256) के आधार पर   106 चैनलों में 1060 से 2644 क्षमता वृद्धि को ही प्रभावित  कर पाया । एसटीबी केवल D2A (डिजिटल से एनालॉग) कन्वर्टर्स के रूप में कार्यरत हैं। अतिरिक्त एसटीबी जहां सब्सक्राइबर परिसर में प्रदान किए गए हैं, उन्हें बिलिंग के लिए अतिरिक्त गणना में जोड़ा नहीं  गया है। केबल ऑपरेटर्स ने सब्सक्राइबर से बिना किसी बिल या रसीद के एकत्र किया गया एक निश्चित मासिक शुल्क (आधार ज्ञात नहीं) वसूली प्रचालन स्थापित  किया। इसका एक भाग एचएसपी को अदा किया जाता था, जिन्होंने एसएमएस के माध्यम से ग्राहकों को बिल देने में असमर्थ होने पर, केबल ऑपरेटरों को उनके द्वारा अर्जित  की जा रही राशि के लिए ही बिल किया, केबल एक्ट और नियमों के विपरीत, जिनमें एचएसपी के लिए केबल ऑपरेटरों को बिल करने  का कोई प्रावधान नहीं है। इस प्रकार, CO ने सब्सक्राइबरों को PAY और FTV (फ्री टू व्यूअर) कार्यक्रमों के बीच अंतर समझाए  बिना, अपने STBs के माध्यम से बहुत सारे प्रोग्राम देख लेने   की आदत डाली( चाहे वोह a-la-carte’या bouquet प्रकार  में हों) जिसके फलस्वरूप  उन्हें बहुत सारे प्रग्राम देखने की लत पड़ गयी थी, अब उतने सारे प्रोग्राम देखने के लिये,   अधिक भुगतान की मांग पर (बिना PAY और निःशुल्क  दर्शन के प्रकार के बीच का अंतर जाने) दर्शकों द्वारा प्रकट किये रोष से ट्राई पर ग्राहक के प्रति शोषण का आरोप मढ़ दिया COs ने  ग्राहकों को यह नहीं जताया  कि पहले उनके द्वारा अपनाया गया चलन  अधिनियम और विनियमों के विपरीत था, जिसे अब लागू करवाया जा रहा है

10. इस बीच, MIBने संसद में घोषणा कर दी  कि DAS कार्यान्वयन पूर्णतया संपन्न हो गया  था और इसलिए ब्रॉडकास्टर्स और राजस्व अधिकारियों के लिए कनेक्टिविटी में पारदर्शिता के साथ लाखों ग्राहकों की वीडियो प्रोग्राम  वितरण प्रणाली को डिजिटल कर दिया गया था। लेकिन सम्पन्नता रिपोर्ट के नतीजों में  पारदर्शिता में कथित आंकड़ों स्वरुप  उस अनुपात से कर वसूली  में वृद्धि नहीं हुई।

11. इसलिए केबल टीवी डीपीओ में कंटेंट डिलीवरी  के लिए हेडएंड प्रोग्राम कैपेसिटी enhancement (प्रोग्राम्स की संख्या वृध्धि) को एक एग्रीगेटेड प्रोग्राम ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम में बढौती सुचांक मन  गया है और एचएफसी के द्वारा इसका ट्रांसमिशन, आंशिक रूप से एचएसपी द्वारा और आंशिक रूप से सीओ द्वारा अपने ऑपरेशन के क्षेत्र में शामिल किया गया है। । इसके कारण एनटीओ में ट्राई द्वारा एनसीएफ (नेटवर्क कैपेसिटी फीस) की प्राप्ति का प्रावधान  शुरू हुआ

12. बिलिंग में नया प्रवेशकर्ता, NCF (नेटवर्कक्षमता शुल्क),था जिसका भुगतान सब्सक्राइबर द्वारा 100 कार्यक्रमों की प्राथमिक चयन सूची  पर बिलिंग चक्र के दौरान देखने के लिए चुने गए कार्यक्रमों के आधार पर किया जाना चाहिए। किसी भी HD प्रोग्राम पसंद को काउंट में दो एसडी प्रोग्राम के बराबर माना गया । कार्यक्रमों की संख्या, 100 से अधिक हो जाने पर , इस देय राशी को अलग-अलग निर्धारित दर से बढाया  जाना था। NCF में, कार्यक्रमों की संख्या को चार्ज किया जाना है, न कि समूह (यानि कि यदि गुलदस्ते को 9 कार्यक्रमों से चुना जाता है, तो गिनती 9 होगी और एक नहीं); इत्यादि

13. ट्राई, शायद इस भ्रान्ति में लिप्त था  कि केबल ऑपरेटर ग्राहकों को सभी कार्यक्रमों  को सम्मिलित करने के लिये मजबूर कर रहे थे। वे, शायद, इस बात से अनजान थे कि सभी कार्यक्रम इस लिए दिखाई दे रहे थे क्योंकि एसटीबी को चयनित प्रोग्राम देखने के लिए SMS द्वारा  प्रोग्राम ही नहीं किया गया था।

14. इसके अलावा, यह माना गया कि कोई भी ग्राहक एक दिन में 20 – 25 PAY  और 50 FTV से अधिक नहीं देखता है। इसलिए शायद एनटीओ में अनिवार्य एनसीएफ में 100 कार्यक्रमों की गणना  को आधारित किया ।

15. यहNCF DTH के लिए एक वरदान  बन गया, क्योंकि वे CATV जैसे नेटवर्क के बिना काम कर रहे थे।

16. नया टैरिफ ऑर्डर (एनटीओ) डैस के कार्यान्वयन को कानून के रूप में लागू करने की परिकल्पना करता है, ग्राहकों को यह चुनने के लिए सशक्त बनाता है कि वे क्या और कब देखना चाहते हैं और उनके चयन को  निम्न के रूप में बिल किया जाए: –

(a) एन.सी.एफ.

(b) एसटीबी आपूर्ति  (एकमुश्त बिक्री, लीजिंग या किरायाखरीद), यदि कोई हो।

(c) PAY  शुल्क; एक ला कार्टे और बुके अलग से।

(d) अन्य शुल्क यदि कोई हो।

(e) सी.जी.एस.टी.

(f) एस.जी.एस.टी.

(g) एक निर्धारित तिथि के भीतर  कुल देय राशी

17. केबलऑपरेटर्स, जो की सब्सक्राइबर्स के अति निकट  संपर्क में होते हैं , (क्योंकि ब्रॉडकास्टर औरHSPs सब्सक्राइबर्स के संपर्क में नहीं होते हैं), ने सब्सक्राइबर्स को यह नहीं बताया था कि उनके द्वारा ही   DAS, कानून की अनदेखी की गयी थी, जिसके फल स्वरुप सुब्स्क्रिबेर्स Headend से प्रसारित समस्त प्रोग्राम एक मासिक शुल्क में देख पा रहे थे. । एनटीओ के अंतर्गत  अब सब्सक्राइबर, यदि सभी 300 से 400 प्रोग्राम देखते हैं, तो उन्हें NCF का 100 से अधिक प्रोग्रामों की संख्या का अतिरिक्त  अधिक भुगतान करना होगा। इसलिए, अपर्याप्त ज्ञान के आभाव में ग्राहक एनटीओ के खिलाफ रोष प्रकट कर रहे हैं । उन्हें यह समझने के लिए अभी तक केबल ऑपरेटर्स द्वारा क़ानून की अनदेखी  किये जाने के विषय से अवगत कराया जाना चाहिए कि पहले जैसे  सभी कार्यक्रमों को देखने के लिए बिल में डे राशी क्यों बढ़ेगी

18. इस कारणवश: –

(a) एनटीओ लक्षित उद्देश्य के रूप में लागू नहीं हो पाया  है। ग्राहक स्तर पर तथ्यात्मक स्थिति के बारे में अवलोकन की कमी के कारण, इसे शोषात्मक  समझा जा रहा   है।

(b) यदि दर्शक, पहले की तरह ही, अपने टीवी सेट पर केबल नेटवर्क पर उपलब्ध समस्त  कार्यक्रमों को देखते हैं तो उन्हें अधिक भुगतान करना  होगा, जब तक कि वे केबल ऑपरेटरों के माध्यम से वोह अपने एसटीबी में अनुमति प्रदानित दर्शनीय  प्रोग्राम की  संख्या कम करवा लेते हैं ताकि उनके मासिक बिल में अनावश्यक वृध्धि न हो. उनको उन्ही प्रोग्रामों का चयन करना चाहिए जो वोह आर रोज़ देखते हैं

(c) कनेक्टिविटी में पारदर्शिता विदित नहीं हो रही है क्योंकि  SMS अभी तक पर्दर्शित ईमानदारी और विश्वास के साथ काम नहीं कर रहा है।

(d) सब्सक्रिप्शन शेयरिंग प्रतिशत (subscription sharing percentage) को लेकर केबल ऑपरेटर्स और HSPs के बीच व्याप्त विवाद और मनमुटाव  का NTO की भावना से कोई लेना-देना नहीं है। यह दोनों के बीच आपसी समझौते का विषय है, बशर्ते यह ICO में भी  दर्ज हो। यह प्रावधान  किया गया  है कि यदि मामले में समझौता नहीं  हो पाता है , तो ट्राई द्वारा सुझावित  अनुपातिक  प्रतिशत  को अपनाया जा सकता है ।

(e) एनसीएफ,  CATV वितरण पद्धति मे एक प्रचलित वितरण प्लेटफ़ॉर्म है जिसमें HSP और CO  दोनों ही संयुक्त हैं, साझेदार के रूप में. अतः व्यापार साझेदारी  और लाभांश वितरण सिद्धांतों के अनुसार , शेयरिंग प्रतिशत को HSP द्वारा  हेड में निवेश के और केबल नेटवर्क स्थापना निवेश के अनुपात में होना चाहिए.. नेटवर्क भी आंशिक रूप से  HSP स्थापित  करते हैं (headend से केबल ऑपरेटर के नेटवर्क location  तक fiberline जिसका   भौतिक  अंश  70% से अधिक होता  है ) और वायरलाइन नेटवर्क ऑपरेशन के अपने क्षेत्र में तैनात हार्डवेयर जो केबल ऑपरेटर निजी निवेश कर के लगते हैं । हेडएंड से कंटेंट आपूर्ति के फलस्वरूप अंतिम चरण के वितरण के अनुपात में  (20 से 100  headend से जुड़े COs द्वारा  अलग-अलग) के आधार पर निवेशों का कुल निवेशित राशी अनुपात  शेयर का आधार  बन  सकता है। व्यक्तिगत सेवा  का विमुद्रण  तत्व(element of monetised value) केबल ऑपरेटरों के लिए विनियोग में जोड़ा जा सकता है। इस लिए COs द्वारा100% एनसीएफ रख लेने  की मांग उचित नहीं लगती है।

(f) PAY content के मूल्य निर्धारण के बारे में समझना आवश्यक है , इसका आधार आज तक MIB या TRAI के समक्ष प्रस्तुत  नहीं हो पाया है  । ट्राई ब्रॉडकास्टर्स द्वारा मांगे गए मूल्य पर सवाल नहीं उठा सकता है, न ही  मामले में हस्तक्षेप  कर सकता है। ब्रॉडकास्टर और एचएसपी के बीच 80:20 शेयरिंग प्रतिशत के बारे में, केबल ऑपरेटर  उनके (ब्राडकास्टर और HSP) बीच B2B ICO के भागीदारनहीं  होते हैं। HSP और केबल ऑपरेटर अपने  बीच B2B ICO के अंतर्गत  एक समझौता  बनाते हैं। इसकी  हिस्सेदारी  आपसी समझौते से और आईसीओ में दर्ज होना अनिवार्य  है।

(g) एसटीबी के स्वामित्व के बारे में, यह समझना   चाहिए कि केबल ऑपरेटरों ने बिना  बिल या रसीद के, लेन-देन की विश्वसनीयता स्थापित किये बगैर  एसटीबी को पूरी कीमत वसूल कर के सब्सक्राइबर को सौंप तो दिया लेकिन उसके स्वामित्व का हस्तांतरण लिखित कागजों द्वारा नहीं किया … सुना है उस राशि का परिवाद HSPs द्वारा ‘सक्रियण शुल्क’ (activation fee)के रूप में बतलाया   जा रहा है, जैसा कि केबल ऑपरेटर्स द्वारा  समझा गया है,  और केबल ऑपरेटर्स द्वारा  स्वीकार भी  किया जाता  रहा है, तो प्रश्न उठता है की  ग्राहक के साथ बॉक्स के लिए कस्टोडियल समझौता कहाँहै? इस प्रचालन का सीधा फायदा HSP को पहुँच रहा है जिनकी stock list में सारे STB विराजमान रहते हैं और उनका अवमूल्यन (depreciation) टैक्स के राहत में भी HSP द्वारा किया जाता रहा है… वास्तविक यथार्त्मक  स्थिति में, ग्राहक ही पीड़ित लगता है

(h) अब तक, एक-मार्गी (uni-directioal), बहु-प्रोग्राम (multi-program), मल्टी-चैनल (RF) वीडियो वितरण प्रणाली (DPO) का संचालन करने वाले केबल ऑपरेटर्स, आवासीय वायरलाइन वीडियो नेटवर्किंग में बहुत उच्च पहुँच के साथ एकाधिकारी बने हुए थे । तकनीकी विकास और डिजिटल इंडिया मानसिकता के अंतर्गत , टेल्को इस सेगमेंट में प्रवेश  कर रहा है, जहां, वीडियो के आलावा, वायरलाइन नेटवर्किंग में उनकी उपस्थिति  पहले से भी थी। वे अब ब्रॉडबैंड को अपनी सेवाओं पर एक और परत की तरह प्रदान करने के इच्छुक हैं और वीडियो भी उप्लब्ध्ध करवा सकते  । वाई-फाई के साथ, टेल्को दर्शकों को  अपने स्वयं-सुविधात्मक  समय, स्थान और डिवाइस में विभिन्न अन्य उपकरणों पर वीडियो देखने के लिए ग्राहकों को पहुंच सुविधा  प्रदान करवा सकते हैं। ओटीटी भी इंटरनेट डिलीवरी के अंतर्गत  ही  संभव है, लेकिन विडियो को ज्यादातर समय अंतरित (time deferred)  किया जाएगा (वास्तविक समय ie real time broadcast नहीं) और डेटा की मात्रा के रूप में बिल किया जाएगा। यह करना ओटीटी के साथ-साथ एफटीए और पे टीवी सामग्री, दोनों,  को देखने के लिए लागू होगा। TELCO पध्धति में content charges का प्रचालन है ही नहीं …वहां उपयोगित समय आधारित (usage based) बिलिंग होती है जिसमें PAY TV और FTV का चार्ज एक सामान किया जायेगा … ऐसे ओटीटी, इंटरनेट सेवा प्रदाता के माध्यम से DoT से प्राप्त लाइसेंस के तहत उप्लब्ध्ध करवाई जाती है , यह OTT का विषय MIB के अंतर्गत नहीं आता है।

(i) केबल ऑपरेटरों को अपने नेटवर्क पर HSP के साथ ब्रॉडबैंड को सम्मिलित  करने के लिए 3Play प्रदान करने के लिए द्विमार्गी क्षमता में अपग्रेड करने की आवश्यकता है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है और टेल्को एफटीटीएच के साथ अग्रसर होता ही  रहता है, तो सब्सक्राइबर बेहतर संगठित सेवा प्रदाता का विकल्प चुन सकते हैं और अमेरिका की तरह ‘कॉर्ड कटिंग’ का सहारा ले सकते हैं।

CATV वितरण प्लेटफार्मों पर कुछ और पहलू

ट्राई द्वारा  उद्घोषित न्यू टैरिफ ऑर्डर (एनटीओ) से परेशान  COs ने  अपनी ही  कार्य प्रणाली , जिसके परिणामस्वरूप ग्राहकों से उच्च भुगतान की मांग को एक निश्चित मासिक सदस्यता के अंतर्गत  headend-casted  नेटवर्क पर प्रसारित किये गए  किए गए तमाम   विडियोसामग्री (PAY और FTA और  उनके  के बीच अंतर को समझे बिना) देखने की आदत है , जिस मे  उनसे अधिक शुल्क वसूलने में असमर्थता के  लिए भी  TRAI को  ग्राहक आक्रोश  के लिए आरोपित कर दिया। उन्होंने ग्राहकों को यह नहीं बताया कि पहले उनके द्वारा अपनाया गया सिस्टम अधिनियम, नियम और विनियमों के अनुकूल नहीं  था, जिसे अब लागू करवाया  जा रहा है।

हताशा में COs द्वारा की गयी कुछ और मांगें/ प्रतिक्रियाएं : –

(a) PAY TV प्रसारकों से उनकी विज्ञापन आय में हिस्सेदारी क्योंकि COs द्वारा एकत्रित दर्शक द्वारा देय राशी  का कुछ अंश  HSP द्वारा ब्रॉडकास्टर को  भी भेजा जा रहा था। वे व्यापार में आधारभूत  निहितार्थ को नजरअंदाज करना चाहते हैं कि लाभांश  भागीदारों द्वारा निवेश के अनुपात में साझा किया जाता है। प्रसारकों के लिए विज्ञापन देने में डीपीओ किसी भी तरह से शामिल नहीं हैं। भारत में टीवी कंटेंट के प्रसारण का प्रारूप हर 30 मिनट के कंटेंट डिस्प्ले स्लॉट में 7.5 मिनट के सम्मिलित विज्ञापन हैं। CATV वितरण में इसके अकार और संरचना में परिवर्तन निषेधित है . DPO, जब तक ICOs में सहमति दर्ज न की गयी हो, तब तक प्रसारित सामग्री से विज्ञापन नहीं हटा  सकते हैं (कुछ केबल ऑपरेटर यह मानते हैं कि ग्राहक सामग्री के लिए भुगतान करता है और विज्ञापन के लिए नहीं जो कि हटा दिया जाना चाहिए. वोह यह भूल जाते हैं कि विडियो सामग्री ‘जैसी प्रसारित वैसी ही वितरित ‘  सिध्धांत पर वितरण के लिए प्रदान की जाती है । जिसको यह आकार पसंद न हो वोह इसका वितरण न करे

(b) ब्रॉडकास्टरों द्वारा उनके द्वारा निर्मित CATV नेटवर्क का उपयोग करने के लिए भुगतान की मांग कर रहे हैं  , यह भी न समझते हुए कि सब्सक्राइबर बिल में प्रतिबिंबित किए जाने वाले नए NTO के तहत इस सुविधा के लिए  ही NCF लगाया गया है

(c) ब्रॉडकास्टर्स से HSP द्वारा वसूला जाने वाला कैरिज और प्लेसमेंट शुल्क में हिस्सा। यह विचारणीय होगा  कि केबल एक्ट  में :-

(i) कैरिज और प्लेसमेंट शुल्क वसूली का प्रावधान है ही  नहीं ,

(ii) कार्यक्रमों का बंडल निर्मानन   भी अनाधिकृत है (केवल ‘ए-ला-कार्टे’ की परिकल्पना की गई थी),

(iii) सब्सक्राइबर्स के बजाय HSPs द्वारा केबल ऑपरेटर्स की बिलिंग  की कुप्रथा प्रचलित हो गयी है ।

( ​​इस तरह की प्रथाओं को मान्यता प्रदान  करने और विनियमों के माध्यम से उन्हें वैध बनाए रखने में कानून में   संशोधन की आवश्यकता है और जब तक ऐसा नहीं हो जाता यह चार्ज अवैध रहेगा)

यह समाचार www.satiitv.com द्वारा लाया गया है

khareलेखक – ले कर्नल(सेवा निवृत) विनोद चंद्र खरे

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