अंतरिक्ष में ISRO की बड़ी छलांग, अब खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा भारत

अंतरिक्ष में ISRO की बड़ी छलांग, अब खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाएगा भारत

भारत अब खुद का स्पेस स्टेशन बनाएगा। इसरो प्रमुख डॉ. के सिवन ने ये जानकारी दी है। इसरो प्रमुख सिवन ने बताया कि भारत अब अपना स्पेस स्टेशन लॉन्च करने की तैयारी में है। इसरो का यह मेगा प्रोजेक्ट गगनयान मिशन का ही विस्तार होगा।

सिवन ने बताया कि हमें मानव अंतरिक्ष मिशन के लॉन्च के बाद गगनयान कार्यक्रम को बनाए रखना होगा। इसी के चलते भारत अपना स्पेस स्टेशन तैयार करने की योजना बना रहा है। बता दें कि इससे पहले इसरो प्रमुख ने बताया था कि भारत का दिसंबर 2021 तक अंतरिक्ष में मनुष्य को भेजने का लक्ष्य है।

गगनयान प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए इसरो प्रमुख ने कहा कि हम इस प्रोजेक्ट की मदद से ऐसा कर पाने में सफल होंगे। इसरो यदि निर्धारित समय के अंदर ऐसा कर लेता है, तो भारत विश्व का चौथा देश होगा जिसका खुद का अंतरिक्ष स्टेशन (Space Center) होगा।

इससे पहले  इसरो प्रमुख ने कहा था कि चंद्रमा की सतह पर खनिजों के अध्ययन और प्रयोग करने के लिए भारत के दूसरे अभियान ‘चंद्रयान-2’ 15 जुलाई को रवाना किया जाएगा। चंद्रयान-2 को लॉन्च करने का प्रमुख उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव हिस्से के बारे में जानकारी इकट्ठा करना है। इसरो प्रमुख ने बताया था कि यह चंद्रयान-2 छह या सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा।

खुद के इंटरनेशनल स्पेस सेंटर की बात करें तो 1971-1986 में सैल्यूट स्पेस स्टेशन (USSR), 1973-1979 में स्काईलैब (यूएस) और 1986-2000 में मीर/ (यूएसएसआर/रूस) थे।

बता दें कि अमेरिका और रूस ने साझा प्रोजेक्ट के तौर पर 1998 में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन बनाया था। कई अन्य देश भी बाद में इसके निर्माण में जुड़ते गए। हालांकि, ज्यादातर कंट्रोल्स और मॉड्यूल्स का खर्च अमेरिका ही उठाता है। 18 देशों के 230 लोग इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में जा चुके हैं। यह धरती से लगभग 400 किमी ऊंचाई पर स्थित है। यह 28 हजार किमी की गति से घूमता है।

इसके अलावा चीन भी दो स्पेस स्टेशन लॉन्च कर चुका है। चीन ने 2011 में अपना पहला स्पेस स्टेशन तियांगोंग-1 लॉन्च किया था। इसे दो साल के लिए तैयार किया गया था। यह 1 अप्रैल 2018 को धरती पर गिरकर नष्ट हो गया था। चीन ने 2016 में तियांगोंग-2 लॉन्च किया। यह अभी भी मौजूद है। चीन 2022 तक तियांगोंग-3 को लॉन्च करने की भी योजना बना रहा है।

गौरतलब है कि मार्च 2019 तक इंटरनेशनल स्पेस सेंटर में कनाडा, जापान, रूसी संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी शामिल हैं।

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